मैंने भी यहाँ ज़िन्दगी के सबसे हशीन लम्हों को बिताया है!

Although it’s copied from somewhere but I find it worth so I am posting it here. I don’t remember from where I copied it.

मैंने भी यहाँ ज़िन्दगी के सबसे हशीन लम्हों को बिताया है,

मैंने भी यहाँ की मेस के ट्रकों को पलटाया है,

मैंने भी यहाँ इंग्लिश में जी भर के मार खाई है,

कभी यहाँ मैंने, भी गणित में डांट पायी है,

मार खा के यहाँ मेरे भी कभी पड़े छाले थे,

मैंने भी कभी यहाँ यूनिट टेस्टों में अंडे उबाले थे,

मैंने भी कभी बैठकर खिल्लियाँ उड़ाई थीं,

सीनियरों के हाथों से मैंने भी मार खाई थी,

कभी कभी मैंने भी जूनियर्स को सताया था,

हॉउस मास्टर के हाथों से उसका परिणाम भी पाया था,

दीवारें मेरे लिए भी कभी इतनी ऊंची नहीं थी,

की मेरी छलांग उनके पार पहुची नहीं थी,

मैंने भी पीछे के खेतों की फसलों को भारी नुकसान पहुचाया था,

मैंने भी सीताफलों का कभी भरपूर आनंद उठाया था,

बेर हों, चने हों, या मटर, मैंने सब को वहां खूब पाया,

टीचर्स के केले हों या प्रिंसिपल का अमरुद, मैंने जी भर के खाया।

मगर फिर भी सच कहूं, ये जगह मुझे अपने घर से आज भी प्यारी है,

जहाँ मैंने दुःख सुख, से भरी अपनी सबसे हशीन ज़िन्दगी गुज़ारी है।

मैंने भी यहाँ ज़िन्दगी के सबसे हशीन लम्हों को बिताया है!

JNV Latehar, Jharkhand.

JNV Latehar, Jharkhand.

 

Thanks,
Prabhat Kumar Ravi
JNV Latehar, Jharkhand.

Categories: For Navodayans, Hindi Poems, JNV Alumni, JNV Family, Memoir | Tags: , , | 2 Comments

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2 thoughts on “मैंने भी यहाँ ज़िन्दगी के सबसे हशीन लम्हों को बिताया है!

  1. Sandip kadam

    Bhaiya ye har ek navodayan ka manogat hai.

  2. peetam singh

    bas navodya ka jalawa banate raho

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