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दर्द माँजता है!!

On behalf of AINAA, we congratulate Ranvijay bhaiya for his book “Dard Maanjta hai”!

‘दर्द मांजता है’ एक कथा संग्रह है! इस संग्रह में लगभग समाज का हर चेहरा मौजूद है। ‘मेरे भगवान’ में सामाजिक मूल्यों का विकास है, वंशी लाल जैसा भोला चरित्र है, वहीं ‘छ्द्म’ में रंजीत दत्त के छल , खल की पराकाष्ठा है। लातूर भूकम्प के भयावह विभीषिका के दर्द के बीच मे विश्वास और प्रेम का नन्हा बीज उगता है, ‘दर्द माँजता है’ में, परन्तु ‘एक तेरा ही साथ’ मे नायक के विश्वास का हनन हो जाता है और ततपश्चात प्रेम की उदारता और उदात्त स्वरूप दिखता है। ‘वंचित’ का नायक अपने ऐश और मौज के लिए जो व्यूह रचता है, उस मे वो अपने को स्वयं फंसा हुआ पाता है। ‘परिस्थितियां’ त्रासदी में उपजती कठिनाइयों और मानवीय क्षमताओं के बीच संघर्ष और संयोजन की कहानी है।‘ट्रेन, बस और लड़की’ का इंतज़ार नही करना चाहिए, क्यों कि एक जाती है तो दूसरी आती है, आत्म सन्तुष्टि के इसी दर्शन को ये कहानी साकार करती है। सरकारी व्यवस्था में व्याप्त चापलूसी, अकर्मण्यता तथा नियोजित भ्रष्टाचार का चित्रण है ‘राजकाज ‘में। ‘कागज़ी इंसाफ’ नियमों, कानूनों की अव्यवहारिकताओं तथा व्यवस्था पर प्रश्न उठाती और दर्द उकेरती है।गांव में ज़मीन हड़पने के दाँव -पेंच, बिखरते मूल्यों के बीच घटित एक बर्फ सा ठंडा और मीठे ज़हर का बदला है ‘प्रतिशोध’में।

dard maanjta hai

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रणविजय का जन्म अप्रैल, 1977 में फैज़ाबाद,उत्तर प्रदेश के एक गांव में हुआ।बचपन गांव की अमराइयों और हरे लहलहाते खेतों के बीच बीता। मेधा के धनी रणविजय जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ने के लिये चयनित हुए और उन्होंने स्कूल टॉप किया।cbse बोर्ड द्वारा उन्हें गणित में मेरिट सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।1994- 1998  तक नैनीताल की खूबसूरत तराइयों में अवस्थित पन्त नगर विश्वविद्यालय से B Tech किया। वे विश्वविद्यालय की साहित्यिक और रचनात्मक गतिविधियों में अग्रणी रूप से सक्रिय रहे।1999 की भारतीय इंजीनियरी सेवा , uppcs, तथा 2001 की भारतीय सिविल सेवा में चयनित हुए।उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा में हिंदी साहित्य एक वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।

उन्होंने भारत सरकार , रेल मंत्रालय के विभिन्न मण्डलों, शहरों में  कार्य किया है। उनको  रेल परिचालन, यातायात योजना, आधारभूत परियोजनाओं, निर्माण, अनुसन्धान इत्यादि क्षेत्रों का ब्यापक अनुभव है। वे वर्तमान में RDSO लखनऊ में निदेशक पद पर कार्य कर रहे हैं। उनकी अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कहानी, कविता की फुटकर रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कहानियों में प्रेमचंद,निर्मल वर्मा और मोहन राकेश जैसे लेखकों का समावेश दिखेगा।कुछ कहानियां कई स्तरों पर एक साथ चलती हैं और कई कथाओं की संश्लिष्ट रचना लगती हैं। कई जगह कहानी विधा में नए प्रयोग दिखेंगे। किसी किसी कहानी का अंत आपको चेखव की कहानियों की तरह चौंका देगा। लेखक mairanvijay@gmail.com,sandhyaranvijay@gmail.com   के नाम से फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर उपलब्ध है।

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