घृणित हिंसा-कोरोना!

कोरोना को हथियार बना कर ,
चीन ने ये जंग छेङी है ।
द्वितीय विश्व युद्ध से भी बङा,
जनमानस को जलती दाह मे ढकेली है।

भारत अपनी राह पे निरंतर,
दृढ़-संयम से डट कर खङी है।
हर एक कतरा सिर पर उठा कर,
पग-पग पर खुद से लङ रही है।

किसने तुमको हक दिया ये,
इस महामारी को फैलाने को ।
ऋणी हो तुम इस मातृभूमि के,
और सहयोग दिया तुमने,
औरौ के जंग को फैलाने को।

आखिर, किस हद तक पङे हो तुम,
इस हिंसा को फैलाने को ।।

——–प्रेरणा —–‐—-

JNV Kolasi Katihar, Bihar

Categories: Hindi Poems, JNV Alumni, JNV Family, Social Cause, Tributes | Tags: | 3 Comments

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3 thoughts on “घृणित हिंसा-कोरोना!

  1. Very Nice poem Prerna. Keep it up.

  2. AMIT KUMAR ANSHU

    हमें तो धूर्त ज़ाहिल जमातियों ने डुबोया वो हूरों के मतवाले थे ।
    जो एक एक कर उनको ट्रेस किया तो देवबंदी कहाँ पीछे रहने वाले थे ।।
    #कोरोनाजिहाद

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